बेंगलुरु, इंडिया,
जैसे ही धृष्टि घर पहुँची, उसने देखा कि हाॅल में कुछ लोग बैठे हुए थे। पर उसने उन लोगों को आज पहले कभी नहीं देखा था, वो अपनी कम्फूजंन से सबको देख रही थी, तभी उसके पापा, प्रतीक, मुस्कुराते हुए बोले,
बेंगलुरु, इंडिया,
जैसे ही धृष्टि घर पहुँची, उसने देखा कि हाॅल में कुछ लोग बैठे हुए थे। पर उसने उन लोगों को आज पहले कभी नहीं देखा था, वो अपनी कम्फूजंन से सबको देख रही थी, तभी उसके पापा, प्रतीक, मुस्कुराते हुए बोले,
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